ये कौन हैं
जो मेरें दिल की धरती पे फैल रहां हैं सार्थक धुप बनकर
समंदर में समंदर का नर्तन करा रहा हैं
पल पल में सदियों की साँसें जोड़ रहां हैं ,
हर बूंद में आकाश गंगा बरसा रहा हैं ,
ये कौन हैं जो
मुझको दीवानी कर खुद घूम रहा हैं होश वाला बनकर
मेरे तन के टहनियों में बनता जा रहा हैं प्यार की पतियाँ ,
जब थक जाता हैं शोरें हरकत ज़माने की अदा से ,
तो पूछता हैं खुद की महफिल में गवाह बनकर
तू कौन हैं जो मुझमें उतरती जा र!ही हैं सरगम बनकर !
चंचल मन फकीरा जैसा, हैं ये बिलकुल चाँद तारों जैसा ,
रखता हैं दिल में अदब नबाबों जैसा ,
हैं तो खुद परेशा हथेलियों में छबी लकीरों से ,
बाँटता फिरता हैं फिर भी खुशियाँ जुगनुयों जैसा ,
ये कौन हैं ..
जिसे बचाकर आफतों से रखना चाहतें हैं,
दिल में कुदरत तेरी अमानत समझकर
ये कौन हैं
जो मुझ में जी रहा हैं मेरी जिंदगी बनकर .............
क्यों हैं तुझ से इतनी मुहब्बत बतां जरा ,
जो मेरें दिल की धरती पे फैल रहां हैं सार्थक धुप बनकर
समंदर में समंदर का नर्तन करा रहा हैं
पल पल में सदियों की साँसें जोड़ रहां हैं ,
हर बूंद में आकाश गंगा बरसा रहा हैं ,
ये कौन हैं जो
मुझको दीवानी कर खुद घूम रहा हैं होश वाला बनकर
मेरे तन के टहनियों में बनता जा रहा हैं प्यार की पतियाँ ,
जब थक जाता हैं शोरें हरकत ज़माने की अदा से ,
तो पूछता हैं खुद की महफिल में गवाह बनकर
तू कौन हैं जो मुझमें उतरती जा र!ही हैं सरगम बनकर !
चंचल मन फकीरा जैसा, हैं ये बिलकुल चाँद तारों जैसा ,
रखता हैं दिल में अदब नबाबों जैसा ,
हैं तो खुद परेशा हथेलियों में छबी लकीरों से ,
बाँटता फिरता हैं फिर भी खुशियाँ जुगनुयों जैसा ,
ये कौन हैं ..
जिसे बचाकर आफतों से रखना चाहतें हैं,
दिल में कुदरत तेरी अमानत समझकर
ये कौन हैं
जो मुझ में जी रहा हैं मेरी जिंदगी बनकर .............
क्यों हैं तुझ से इतनी मुहब्बत बतां जरा ,
पहचानता क्यों हैं मेरे नैनो के दस्तक बतां जरां,
रुकता क्यों हैं मेरी सोच पे दर्सा जरां ,
मैं राह नही तेरी तो मुड़ता क्यों हैं मेरी ओर -जता जरां ,
हक से हैं तू प्रेम्परिसर में बैठा
क्या हैं तुझ में मेरा भी आना जाना समझा जरां
न पहले तू कुछ बोल न अब बोल पायेगा ,
दिया हैं तुझ को ही सारा सनातन
लेकिन मान ले मेरी इक ही अर्जी
हु मैं संग -संग तेरे
बस हर पल तू मुस्कुरा जरां