Friday, February 22, 2013

मुहब्बत करना !


रखना दिल में  नमाज़ी  नियत 
तो  
मुहब्बत करना !
होना खुद से जुदा 
तो 
मुहब्बत करना !

हो बरगद जैसी छावनी 
तो 
मुहब्बत करना !

शिदत हो गर दिया बाती जैसा ,
 तो 
मुहब्बत करना!
मुस्कानों में हो  नमीं पनघट की ,
तो 
मुहब्बत करना !

तन में हो खुशबूँ  गंधक की 
तो
 मुहब्बत करना!

 गर बाँच सकों कल्माई ऑंखें 
तो 
मुहब्बत करना !

बना सको जिगर  शिखर में मंदिर 
तो 
मुहब्बत करना !

हो जबां अशिर्बादी 
तो 
मुहब्बत करना!

हो रूह तक चौधवी   चमक 
तो 
मुहब्बत करना !

चल सकों राह से राह तक 
तो
 मुहब्बत करना !

जो समां सके इक ग्रन्थ में 
ये वो सज्दां नही ,

मिल सके अंत छितीज 
ये वो त्रिलोक नही 
हो हर मन  राधा रमण 
करें हर दिल बस ऐसी ही 
पाकिजी मुहब्बत 
हर कही  हर तरफ .......






1 comment:

  1. ..गर अंतर्मन सच्चा हो ..तो ..

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